सीमा विवाद में खनन माफिया की मौज

पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल और उत्तराखंड की यमुना तथा टौंस नदी के साथ करीब 27 किलोमीटर सीमा साथ लगती है। इन क्षेत्रों में पिछले कई वर्षों से राज्य की सीमा को लेकर विवाद उठता रहा है। सीमा विवाद का सबसे ज्यादा फायदा दोनों राज्यों के अवैध खनन माफिया उठा रहे हैं।
पड़ोसी राज्य के साथ यमुना नदी पर करीब 17 किलोमीटर क्षेत्र तथा टौंस नदी पर 10 किलोमीटर हिस्सा दोनों राज्यों के साथ लगता है। इन सीमा क्षेत्रों में सही पैमाइश तथा सीमा बुर्जियां नहीं लगी हैं। इसका अवैध खनन माफिया सीधा लाभ उठा रहे हैं। नदियों पर लंबी सीमा क्षेत्र में दर्जनों स्थलों पर एकदम सीमा पर कार्य हो रहा है। हिमाचल से टीम पहुंचने पर उत्तराखंड में वाहन भाग खड़े होते हैं।
उत्तराखंड से दबिश देने पर हिमाचल क्षेत्र में वाहन प्रवेश कर जाते हैं। इस विस्तृत और विवादित सीमा से खनन विभाग, वन और पुलिस विभाग को भी काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। करीब 6 वर्ष पहले दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद निपटाने को कुछ शुरुआत भी हुई। लेकिन पांवटा और विकासनगर एसडीएम कार्यालयों के बीच बात आगे नहीं बढ़ सकी। इसलिए इस विवादित क्षेत्र में अवैध खनन माफियाओं की खूब तूती बोलती है। अब अवैध खनन माफिया की जुर्रत दिनों दिन बढ़ती जा रही है। अधिकारियों की टीमें भी इन क्षेत्रों में औचक निरीक्षण से कतराने लगी हैं।
निरीक्षण के दौरान राज्यों की विस्तृत सीमा का विवाद हमेशा आड़े आ जाता है। इस क्षेत्र के विवाद को दोनों राज्यों की सरकारें और प्रशासन निपटा सकता है। सीमा विवाद निपटने से दोनों राज्यों की संयुक्त टीमों की पेट्रोलिंग से अवैध खनन पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

विकासनगर एसडीएम से करेंगे बात : मांटा
एसडीएम पांवटा श्रवण मांटा ने बताया कि दोनों राज्यों की सीमा क्षेत्र के बारे में एसडीएम विकासनगर (उत्तराखंड) से बात करेंगे। इससे राज्य की नदी क्षेत्र में सीमा विवाद को सुलझाया जा सकेगा।

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